रायपुर संभाग (छत्तीसगढ़) में अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों में प्रजननता
अनुसुइया बघेल
भूगोल अध्ययनशाला, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर, छत्तीसगढ़ ।
सारांश
प्रस्तुत अध्ययन में आंकड़े रायपुर संभाग के 45 तहसीलों में से 111 गाॅवों के 15 से 49 वर्ष उम्र (पुनरूत्पादन आयु वर्ग) की 3267 विवाहित महिलाओं से अनुसूची के आधार पर एकत्र की गई है। प्रस्तुत अध्ययन में रायपुर संभाग में अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों में प्रजननता स्तर, प्रजननता में भिन्नता, कारण और उनके निर्धारकों की व्याख्या की गई है। रायपुर संभाग के ग्रामीण क्षेत्रों में नगरीय क्षेत्रों से प्रजननता अधिक है। नगरीय अधिवासों का प्रजननता को कम करने में प्रमुख भूमिका रही है। प्रति स्त्री बच्चों की संख्या अनुसूचित जाति और अन्य जनसंख्या दोनों से अनुसूचित जनजाति मंे कम है। प्रजननता को प्रभावित करने वाले जनांकिकीय, सामाजिक एवं आर्थिक कारकों का विश्लेषण किया गया है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति में प्रजननता में भिन्नता के लिए महिलाओं के विवाह की आयु और परिवार नियोजन की विधियों का उपयोग उत्तरदायी है। अनुसूचित जाति के महिलाओं के विवाह की आयु और परिवार नियोजन की विधियों का उपयोग अनुसूचित जनजाति में अधिक है। अध्ययन में बाल मत्र्यता दर, महिलाओं का शैक्षणिक स्तर एवं पारिवारिक आय भी प्रजननता के महत्वपूर्ण निर्धारक के रूप् में पाया गया है।
प्रस्तावना
जनसंख्या वृद्धि के मौलिक तीन संघटक प्रजननता, मत्र्यता और प्रवास है। प्रजननता जन्म की घटिता को प्रदर्शित करती है, जिसे संतानोत्पादकता के अर्थ में नहीं लिया जा सकता है। कुल संतानोत्पादकता दर ; ज्वजंस थ्मबनदकपजल त्ंजमद्ध संतानों की वह संभावित संख्या है जो किसी महिला के संपूर्ण प्रजनन काल में हो सकती है बशर्तें कि वह महिला परिवार नियोजन की किसी भी विधि का प्रयोग न करें, प्रेरित गर्भपात ;प्दकनबमक ।इवतजपवदद्ध न कराए, तथा बच्चों को स्तनपान न कराए। ऐसी महिलाओं को जिन्मे संतनोत्पादकता न हो अप्रजननीय ;प्दमिबनदकद्ध कहा जाता है। वास्तव में, स्त्री की संतानोत्पादकता ही मानव समाज की निरंतरता का आधार है। संतानोत्पादकता का माप कठिन है किंतु प्रजननता मापने की कई विधियाँ है।
अध्ययन के उद्देश्य
इस अध्ययन के उद्धेश्य निम्नलिखित हैं:
1. रायपुर संभाग में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति जनसंख्या में प्रजननता की स्थिति का परीक्षण,
2. विभिन्न अनुसूचित जातियों और जनजातियों में प्रजननता में भिन्नता की व्याख्या,
3. प्रजननता को प्रभावित करने वाले जनांकिकीय, सामाजिक और आर्थिक कारकों की विवेचना,
4. संभाग में परिवार नियोजन कार्यक्रम के क्रियान्वयन एवं प्रभाव की व्याख्या।
अध्ययन क्षेत्र
यह अध्ययन छत्तीसगढ़ राज्य के रायपुर सभाग (19047’-22031’ उत्तर, 80023’-83017’ पूर्व, क्षेत्रफल 41,775 वर्ग किलोमीटर) की अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति जनसंख्या में प्रजननता से संबंधित है। रायपुर संभाग की जनसंख्या 2001 की जनगणना के अनुसार 88,82,283 है। संभाग में अनुसूचित जाति जनसंख्या 10,49,009 और अनुसूचित जनजाति जनसंख्या 11,16,272 है जो कुल जनसंख्या का क्रमशः 13.7 प्रतिशत और 14.5 प्रतिशत है।
आँकडे़ एवं विधितंत्र
यह अध्ययन प्राथमिक आँकड़़ों पर आधारित है। आँकड़ों का संकलन व्यक्तिगत सर्वेक्षण द्वारा 1999 में किया गया है। इस हेुत दो अनुसूचियों का प्रयोग किया गया। प्रथम, पारिवारिक अनुसूची और द्वितीय, व्यक्तिगत अनुसूची। व्यक्तिगत अनुसूची में केवल पुनरुत्पादन आयु वर्ग (15 से 49 वर्ष उम्र) की विवाहित महिलाओं से सूचनाएँ ली गई है।
अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों का वितरण प्रतिरूप समान नहीं है। मैदानी क्षेत्र में अनुसूचित जाति जनसंख्या और इसके विपरीत पठारी क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति जनसंख्या अपेक्षाकृत अधिक है। यह भी उल्लेखनीय है कि पठारी क्षेत्र के अनुसूचित जनजाति जनसंख्या वाले गाँव जनसंख्या की दृष्टि से प्रायः छोटे आकार के हैं। प्राथमिक आँकड़ों के संकलन के लिए क्षेत्र के कुल 111 ग्रामों का चयन किया गया है। रायपुर संभाग में कुल 35 तहसीलें हैं।
क्षेत्र की 35 तहसीलों में से प्रत्येक का प्रतिनिधित्व कम से कम एक ग्राम द्वारा अवश्य हों, तथा चयनित ग्राम में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति जनसंख्या पर्याप्त हो, इस बात का ध्यान रखा गया है। ग्रामों का चयन उद्देश्यपूर्ण निदर्शन द्वरा किया गया है। जिन तहसीलों में (जैसे पठारी तहसीलों) छोटे आकार के गाँव हैं वहाँ निदर्शन आकार को तर्कसंगत बनाने के लिए एक गाँव की जगह कई गाँवों के समूह का चयन किया गया।
चयनित ग्रामों की अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति की सभी पुनरुत्पादन आयु वर्ग की महिलाओं को अध्ययन में शामिल किया गया है। यदि एक बार जाने पर कोई महिला नहीं मिली तो उसके पास दोबारा जाया गया। इन सभी महिलाओं के साक्षात्कार द्वारा पारिवारिक और व्यक्तिगत अनुसूचियाँ भरी गई। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति जनसंख्या का अन्य जनसंख्या के साथ तुलना के उद्देश्य से अन्य जनसंख्या की महिलाओं से भी अनुसूची के माध्यम से सूचना एकत्र की गई। कुल 1211 अनुसूचित जाति, 1472 अनुसूचित जनजाति और 584 अन्य जनसंख्या की महिलाओं से अनुसूची के माध्यम से सूचना एकत्र की गई। इस प्रकार यह अध्ययन पुनरुत्पादन आयु वर्ग (15 से 49 वर्ष उम्र) की कुल 3267 विवाहित महिलाओं से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर किया गया है।
प्रजननता दर ;थ्मतजपसपजल त्ंजमद्ध
अशोधित जन्म दर ;ब्तनकम ठपतजी त्ंजमद्ध का प्रयोग प्रजननता दर एवं जनसंख्या वृद्धि पर प्रभाव देखने के लिए किया जाता हैं अशोधित जन्म दर प्रति हजार जनसंख्या पर जीवित जन्म की संख्या है। रायपुर संभाग में अशोधित जन्म दर 25.2 प्रति हजार है। अशोधित जन्म दर अनुसूचित जाति में 29.3, अनुसूचित जनजाति में 22.8 और अन्य जनसंख्या में 23.3 प्रति हजार है। अनुसूचित जाति में सबसे अधिक अशोधित जन्म दर बसोड़ में 65.5 प्रति हजार और सबसे कम गाड़ा में 15.4 प्रति हजार है। सतनामी में भी यह दर औसत से अधिक (32.0 प्रति हजार) है। अनुसूचित जनजाति में सबसे अधिक जन्म दर भंुजिया में 34.4 प्रति हजार और सबसे कम कवर जनजाति में 8.1 प्रति हजार है। अशोधित जन्म दर हल्बा (24.5 प्रति हजार) और गोंड़ में (23.8 प्रति हजार) में औसत से अधिक है।
सामान्य प्रजननता दर ;ळमदमतंस थ्मतजपसपजल त्ंजमद्ध कुल सजीव जन्मे बच्चों एवं पुनरुत्पादन आयु की विवाहित स्त्रियों की संख्या से संबंधित है। रायपुर संभाग में सामान्य प्रजननता दर 119 प्रति हजार है। सामान्य प्रजननता दर अनुसूचित जाति में 139, अनुसूचित जनजाति में 105 और अन्य जनसंख्या में 115 प्रति हजार है। अनुसूचित जाति में अशोधित जन्म दर के समान सामान्य प्रजननता दर बसोड़ में सर्वाधिक (344 प्रति हजार) और गाड़ा में सबसे कम (66 प्रति हजार) है। अनुसूचित जनजाति में सामान्य प्रजननता दर भंुजिया (167 प्रति हजार) में सर्वाधिक और कवर में सबसे कम है।
किसी जनसंख्या में शिशुओं और स्त्रियों की संख्या के बीच का अनुपात प्रजननता अनुपात (थ्मतजपसपजल त्ंजपव) है। रायपुर संभाग में प्रजननता अनुपात 756 प्रति हजार है। प्रजननता अनुपात अनुसूचित जाति में 814, अनुसूचित जनजाति में 692 और अन्य जनसंख्या में 798 प्रति हजार है। अनुसूचित जाति में प्रजननता अनुपात सबसे अधिक बसोड़ में 1281 प्रति हजार और सबसे कम मेहर में 607 प्रति हजार है। देवार में भी प्रजननता अनुपात अधिक (1056 प्रति हजार) है। अनुसूचित जनजाति में सबसे अधिक प्रजननता अनुपात सवरा में 1021 और सबसे कम कवर में 436 प्रति हजार है।
किसी विशेष आयु वर्ग के प्रति हजार स्त्रियों द्वारा जन्मित बच्चों की संख्या ही आयु-विशिष्ट प्रजननता दर (।हम.ैचमबपपिब थ्मतजपसपजल त्ंजम) हैं। स्त्रियों मंे संतोनात्पादन क्षमता सभी उम्रों में समान नहीं होती। आयु-विशिष्ट प्रजननता दर से इसके क्रम और सीमा का ज्ञान होता है। सामान्यतः प्रजननता दर प्रारंभिक आयु वर्गों में कम तथा 20 से 29 आयु वर्ग में सबसे अधिक रहती हैं। तत्पश्चात् प्रजननता दर पुनः घटने लगती है। रायपुर संभाग में सर्वाधिक प्रजननता दर 20 से 24 आयु वर्ग में 231.3 प्रति हजार है। इस आयु वर्ग के पूर्व 15 से 19 आयु वर्ग में प्रजननता दर कम (172.7 प्रति हजार) है। इसी तरह 20 से 24 आयु वर्ग के बाद प्रजननता दर में क्रमशः कमी हुई है। अनुसूचित जाति में प्रत्येक आयु वर्ग में आयु-विशिष्ट प्रजननता दर अनुसूचित जनजाति और अन्य जनसंख्या से अधिक है (सारणी 1 एवं रेखाचित्र 1)। सर्वाधिक प्रजननता वाले आयु वर्ग (20 से 24) में प्रजननता अनुसूचित जाति में 264.5 प्रति हजार, अनुसूचित जनजाति में 205.0 प्रति हजार और अन्य जनसंख्या में 224.6 प्रति हजार है। अनुसूचित जनजाति के अंतर्गत सतनामी में प्रत्येक आयु वर्ग में प्रजननता दर अनुसूचित जातियों के औसत से अधिक है। सतनामी की तुलना में मेहर जाति में प्रत्येक आयु वर्ग में आयु-विशिष्ट प्रजननता दर कम है। मेहर में 20 से 24 आयु वर्ग में प्रजननता 263.2 प्रति हजार और सतनामी में 282.5 प्रति हजार है। अनुसूचित जनजाति के अंतर्गत हल्बा में 20 से 24 आयु वर्ग में प्रजननता दर 283.0 प्रति हजार है।
सारणी 1
आयु-विशिष्ट प्रजननता दर
आयु वर्ग अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अन्य जनसंख्या कुल
15.19 255.8 123.6 43.5 171.7
20.24 264.5 205.9 224.6 231.3
25.29 168.6 132ण्3 153.2 149.6
30.34 98.6 90.9 117.2 99.3
35.39 39.7 29.7 13.9 30.6
40.44 17.5 44.9 27.8
45.49 13.9 6.8
कुल 138.7 105.3 117.7 119.1
किसी स्त्री के सम्पूर्ण प्रजनन काल में उत्पन्न बच्चों की संख्या कुल प्रजननता दर (ज्वजंस थ्मतजपसपजल त्ंजम) होती है। कुल प्रजननता दर काल्पनिक है। यह उन महिलाओं के समूह के द्वारा कुल जन्मे बच्चों की संख्या है जो पूरे प्रजनन काल से होकर गुजरती है। रायपुर संभाग में कुल प्रजननता दर 3.58 प्रति स्त्री है। कुल प्रजननता दर अनुसूचित जाति में 4.21, अनुसूचित जनजाति में 3.2 और अन्य जनसंख्या में 2.79 प्रति स्त्री है। अनुसूचित जनजाति में कुल प्रजननता दर सतनामी में 4.68 और मेहर में 3.16 प्रति स्त्री है। अनुसूचित जनजाति में कुल प्रजननता दर गोंड़ में 3.42 और हल्बा में 3.52 प्रति स्त्री है।
रेखाचित्र 1
सकल पुनरुत्पादन दर (ळतवेे त्मचतवकनबजपवद त्ंजम) किस दर पर माताएँ, कन्याओं (नई पीढ़ी) द्वारा प्रतिस्थापित की जाएँगी, को स्पष्ट करता है। सकल पुनरुत्पादन दर 15 से 49 आयु वर्ग की स्त्रियों के केवल कन्या जन्म पर आधारित आयु-विशिष्ट प्रजननता दरों का योग है। रायपुर संभाग में सकल पुनरुत्पादन पर 1.86 शिशु बालिका प्रति स्त्री है। अनुसूचित जाति में सकल पुनरुत्पादन दर 2.32, अनुसूचित जनजाति में 1.61 और अन्य जनसंख्या में 1.34 शिशु बालिका प्रति स्त्री है। अनुसूचित जाति में सकल पुनरुत्पादन दर सतनामी (2.60 प्रति स्त्री) में सर्वाधिक है। अनुसूचित जनजाति में गोंड़ (1.70 प्रति स्त्री) में यह दर सर्वाधिक है।
समग्र प्रजननता दर (व्अमतंसस थ्मतजपसपजल त्ंजम) विभिन्न आयु समूहों में स्त्रियों के द्वारा कुल जन्मे बच्चों की संख्या है। समग्र प्रजननता दर में आयु में वृद्धि के साथ वृद्धि होती है। समग्र प्रजननता दर 15 से 19 आयु वर्ग में 0.67 प्रति स्त्री है जो 20 से 24 आयु वर्ग में दोगुना (1.41 प्रति स्त्री) हो गई है। 25 से 29 आयु वर्ग में यह दर बढ़कर 2.51 प्रति स्त्री है। समग्र प्रजननता दर 35 से 39 आयु वर्ग में सर्वाधिक (3.44 प्रति स्त्री) है। समग्र प्रजननता दर अनुसूचित जाति (3.61 प्रति स्त्री), अनुसूचित जनजाति (3.27 प्रति स्त्री) और अन्य जनसंख्या (3.60 प्रति स्त्री) तीनों में 35 से 39 आयु वर्ग में सर्वाधिक है। इस आयु वर्ग में समग्र प्रजननता दर सतनामी में सर्वाधिक (4.03 प्रति स्त्री) है।
पूर्ण प्रजननता दर (ब्वउचसमजमक थ्मतजपसपजल त्ंजम) 45 से 49 वर्ष उम्र की स्त्रियों जो प्रजनन काल की समाप्ति पर हों, के द्वारा जन्मे कुल बच्चों की संख्या है। यह परिवार के औसत आकार को बताता है। रायपुर संभाग में पूर्ण प्रजननता दर 3.04 प्रति स्त्री है। पूर्ण प्रजननता दर अनुसूचित जाति में 3.13, अनुसूचित जनजाति में 2.97 और अन्य जनसंख्या में 3.04 प्रति स्त्री है। अनुसूचित जाति में पूर्ण प्रजननता दर सबसे अधिक देवार में 3.75 प्रति स्त्री और सबसे कम मेहर में 2.33 प्रति स्त्री है। अनुसूचित जनजाति में पूर्ण प्रजननता दर गोंड़ में सर्वाधिक 3.16 प्रति स्त्री और सबसे कम कवर में 2.12 प्रति स्त्री है।
पुनरुत्पादन आयु वर्ग की कुल स्त्रियों के द्वारा कुल सजीव जन्मे बच्चों की संख्या प्रति विवाहित स्त्री जन्मे बच्चों की संख्या (ब्ीपसकतमद म्अमत ठवतद) है। रायपुर संभाग में प्रति विवाहित स्त्री जन्मे बच्चों की संख्या 2.54 है। यह संख्या अनुसूचित जाति में
2.64, अनुसूचित जनजाति में 2.46 और अन्य जनसंख्या में 2.52 प्रति स्त्री है (सारणी 2)। अनुसूचित जनजाति में प्रति विवाहित स्त्री जन्मे बच्चों की सर्वाधिक संख्या बसोड़ में 3.16 और सबसे कम गाड़ा में 1.98 है। अनुसूचित जनजाति मे प्रति स्त्री जन्मे बच्चों की संख्या सबसे अधिक भंुजिया में 2.62 और सबसे कम कवर में 1.81 है।
सारणी 2
प्रति विवाहित स्त्री कभी भी जन्मे बच्चे
अनुसूचित
जाति प्रति स्त्री
बच्चे अनुसूचित
जनजाति प्रति स्त्री
बच्चे
सतनामी 2ण्77 गोड़ 2ण्53
मेहर 2ण्43 हल्बा 2ण्61
गाड़ा 1ण्98 कवर 1ण्82
देवार 3ण्08 कमार 2ण्60
बसोड़ 3ण्16 भुंजिया 2ण्62
अन्य जाति 2ण्51 सवरा 1ण्91
कुल 2ण्64 अन्य जनजाति 1ण्95
कुल 2ण्53
किसी एक वितरण को प्रमाप वितरण मानकर प्रमाप जन्म दर (ैजंदकंतकप्रमक ठपतजी त्ंजम) की गणना की जाती है। प्रमाप जन्म दर ज्ञात करने के लिए जीवन तालिका की सहायता से जनसंख्या का प्रामाणिक आयु वितरण ज्ञात कर लिया जाता है। रायपुर संभाग में प्रमाप जन्म दर 25.3 प्रति हजार है। प्रमाप जन्म दर अनुसूचित जाति में 28.6, अनुसूचित जनजाति मेे 22.8 और अन्य जनसंख्या में 23.0 प्रति हजार है।
शुद्ध पुनरुत्पादन दर (छमज त्मचतवकनबजपवद त्ंजम) में प्रति महिला कितने शिशु बालिकाओं को जन्म देती हैं जो स्वयं माता को प्रतिस्थापित करने के लिए पूरे प्रजनन काल तक जीवित रहती है, की गणना की जाती हैं। शुद्ध पुनरुत्पादन दर मृत्यु के तत्व को परिकलन में शामिल करती है। इसके लिए भी जीवन तालिका का प्रयोग किया जाता है। रायपुर संभाग में शुद्ध पुनरुत्पादन दर 1.29 प्रति स्त्री है। शुद्ध पुनरुत्पादन दर अनुसूचित जाति में 1.62, अनुसूचित जनजाति में 1.08 और अन्य जनसंख्या में 0.92 प्रति स्त्री है।
प्राप्त सूचना के आधार पर विभिन्न प्रजननता दरों की गणना की गई है किंतु प्रजननता को प्रभावित करने वाले कारकों को स्पष्ट करने के लिए प्रति विवाहित स्त्री कभी भी जन्मे बच्चों की संख्या को आधार माना गया है। क्योंकि इसमें कुल सजीव जन्मे बच्चों को शामिल किया जाता है।
प्रजननता के निर्धारक ;क्मजमतउनदंदजेव िथ्मतजपसपजलद्ध
मानव व्यवहार के अन्य स्वरूपों के भाँति प्रजननता भी अभिप्रेरणा बिना घटित नहीं होती। प्रजननता को प्रभावित करने वाले कारकों में इतनी अधिक विविधता है कि विभिन्न जनांकिकीविदों ने इन्हें विभिन्न प्रकार से वर्गीकृत किया है। यद्यपि प्रजननता एक जीवशास्त्रीय परिघटना है परन्तु वास्तव में प्रजननता को प्रभावित करने वाले कारक जैविकीय, आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक एवं राजनैतिक भी है। ‘‘प्रजननता को प्रभावित करने वाले घटक असंख्य हैं। वे सामाजिक भी हैं राजनैतिक भी, वे धार्मिक भी हैं तथा आर्थिक भी। प्रजननता एक सामाजिक विषय भी है तथा विशुद्ध वैयक्तिक विषय भी। अतः इसके कारकों की पूर्ण सूची बनाना कठिन कार्य है’’ (राइडर, 1959)।
विवाह की प्रभावी आयु ;म्ििमबजपअम ।हम ंज डंततपंहमद्ध
विवाह की आयु प्रजननता को निर्धारित करने वाला प्रमुख घटक है। विवाह की अधिक आयु प्रजननता को कम करती है। जब विवाह की आयु बढ़ती है तो पुनरुत्पादन काल का विस्तार घट जाता हैं (खान, 1991 ; ड्राइवर, 1963)। भारत में बाल विवाह के विरुद्ध कानून बन चुका है, जिसके अनुसार लड़कियों के विवाह न्यूनतम आयु 18 वर्ष निश्चित की गई है। फिर भी कुछ शिक्षित परिवारों को छोड़कर बाल विवाह आज भी सम्पूर्ण भारत में एक लोकप्रिय प्रथा के रूप में प्रचलित हैं जिसका स्वाभाविक फल ऊँची जन्म दर है।
रायपुर संभाग में महिलाओं में विवाह की औसत प्रभावी आयु (गवना की आयु) 17.3 वर्ष है। लगभग एक-तिहाई महिलाओं का विवाह 16 और 17 वर्ष की उम्र में हुआ है। 18 वर्ष उम्र पूर्व विवाहित महिलाएँ अनुसूचित जाति में 58.1 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति में 59.2 प्रतिशत और अन्य जनसंख्या में 49.7 प्रतिशत हैं। विवाह की प्रभावी आयु अनुसूचित जाति के महिलाओं में 16.8 वर्ष, अनुसूचित जनजाति की महिलाओं में 17.2 वर्ष और अन्य जनसंख्या में 17.6 वर्ष है। अनुसूचित जाति के अंतर्गत देवार में विवाह की प्रभावी आयु सबसे कम 15.1 वर्ष है। इसके विपरीत मेहर जाति में विवाह की प्रभावी आयु सर्वाधिक 18.6 वर्ष है। अनुसूचित जनजाति के अंतर्गत कमार (15.5 वर्ष) और भंुजिया (16.4 वर्ष) में विवाह की औसत आयु कम है।
सारणी 3
विवाह की प्रभावी आयु और प्रजननता
विवाह की प्रभावी आयु (वर्ष) प्रति स्त्री बच्चे
अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति कुल
झ 24 1ण्55 2ण्10 1ण्91
22.23 2ण्13 2ण्12 2ण्12
20.21 2ण्25 2ण्18 2ण्24
18.19 2ण्24 2ण्35 2ण्26
16.17 2ण्69 2ण्37 2ण्52
14.15 3ण्14 2ण्78 2ण्96
ढ 14 3ण्43 3ण्22 3ण्34
विवाह की प्रभावी आयु और प्रजननता में ऋणात्मक संबंध होता है। रायपुर संभाग में 14 वर्ष से कम उम्र में विवाहित महिलाओं में प्रति स्त्री बच्चों की संख्या 3.34 है। 14 से 15 वर्ष की उम्र में विवाहित महिलाओं में प्रति स्त्री बच्चों की संख्या कम होकर 2.92 है। 18 और 19 वर्ष की उम्र में विवाहित महिलाओं में प्रजननता घटकर लगभग दो-तिहाई (2.26 प्रति स्त्री) हो गई है (सारणी 3)। उल्लेखनीय है कि 24 वर्ष और उससे अधिक उम्र में विवाहित महिलाओं में प्रजननता 2 से कम (1.91 प्रति स्त्री) है। इस प्रकार प्रति स्त्री बच्चों की संख्या 18 वर्ष से कम उम्र में विवाहित महिलाओं में 2.77 एवं 18 वर्ष से अधिक उम्र में विवाहित महिलाओं में 2.22 है। ‘‘विवाह की आयु का प्रजननता पर प्रभाव केवल उन समाजों में महत्वपूर्ण है जहाँ परिवार नियोजन की विधियों का बहुत कम उपयोग होता है’’ (चैधरी, 1982)।
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति दोनों मे विवाह की आयु में र्वृिदध से प्रजननता में कमी हुई है। 16 से 17 वर्ष की उम्र में विवाहित महिलाओं में प्रति स्त्री बच्चों की संख्या अनुसूचित जाति में 2.69 और अनुसूचित जनजाति में 2.37 है जो 20 और 21 उम्र वर्ष में घटकर 2.25 और 2.18 प्रति स्त्री और 22 और 23 वर्ष उम्र में 2.13 और 2.03 है। महिलाओं के विवाह की प्रभावी आयु और प्रजननता के मध्य ऋणात्मक सहसंबंध (0.2042) पाया गया है। ‘‘युवा विवाहित दम्पतियों पर विवाह के पश्चात् बच्चों के शीघ्र जन्म हेतु अभिभावकों का दबाव अधिक होता है, ताकि विवाहित जीवन अधिक सुदृढ़ हो सके’’ (संयुक्त राष्ट्र, 1997)।
जन्म क्रम (ठपतजी व्तकमत)
जन्म क्रम और प्रजननता का धनिष्ट संबंध होता है। जन्म क्रम सामान्य प्रजननता दर की गणना के द्वारा प्रजननता में परिवर्तन के आकलन के लिए उपयुक्त विधि है (बोग, 1969)। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य जनसंख्या तीनों में जन्म क्रम में वृद्धि के साथ प्रजननता दर में क्रमशः कमी हुई है (सारणी 4) । रायपुर संभाग में प्रथम जन्म क्रम पर प्रजननता दर 36.7 प्रति हजार है। यह दर द्वितीय क्रम पर 30.3 प्रति हजार और तृतीय क्रम पर 26.3 प्रति हजार है। चैथे क्रम पर प्रजननता दर तीसरे क्रम के आधे से भी कम (12.9 प्रति हजार) है। सातवें क्रम पर यह दर घटकर मात्र 1.8 प्रति हजार है।
सारणी 4
जन्म क्रम और प्रजननता
जन्म क्रम
;ठपतजी व्तकमतद्ध सामान्य प्रजननता दर
अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अन्य जनसंख्या कुल
प् 41ण्3 34ण्0 36ण्8 36ण्7
प्प् 32ण्2 28ण्5 30ण्8 30ण्3
प्प्प् 29ण्7 21ण्7 30ण्8 26ण्3
प्ट 18ण्2 11ण्5 5ण्1 12ण्9
ट 9ण्9 4ण्1 10ण्3 7ण्4
टप् 3ण्3 4ण्1 1ण्7 3ण्4
टप्प् 3ण्3 1ण्4 . 1ण्8
टप्प्प् 0ण्8 . . 0ण्3
कुल 138ण्7 105ण्3 114ण्7 119ण्1
अन्य जनसंख्या की तुलना में अनुसूचित जाति में प्रत्येक क्रम पर प्रजननता अधिक और अनुसूचित जनजाति में कम है। प्रथम क्रम पर अनुसूचित जाति में प्रजननता दर 41.3, अनुसूचित जनजाति में 34.0 और अन्य जनसंख्या में 36.0 प्रति हजार हैं। तीन से अधिक जन्म क्रम पर प्रजननता दर अनुसूचित जाति में 25.8 प्रति हजार है। यह दर अनुसूचित जनजाति में 21.1 और अन्य जनसख्या में 17.1 प्रति हजार है। इसके अतिरक्त अनुसूचित जाति के तृतीय जन्म क्रम के प्रजननता दर (29.7 प्रति हजार) से अनुसूचित जनजाति में द्वितीय जन्म क्रम पर प्रजननता दर (28.5 प्रति हजार) कम है जो अनुसूचित जाति में उच्च प्रजननता को स्पष्ट करती है।
समानता (च्ंतपजल)
समानता से तात्पर्य समान बच्चों की संख्या वाली महिलाओं की संख्या है। ‘‘समानता आयु-विशिष्ट सम्भावना में परिवर्तन के द्वारा प्रजननता प्रतिरूप में परिवर्तन को बताता है’’ (बोग, 1969)। रायपुर संभाग में तीन समानता वाली महिलाएँ 21.9 प्रतिशत है। एक और दो समानता वाली महिलाओं का प्रतिशत क्रमशः 19.4 और 21.7 प्रतिशत है। पाँच समानता वाली महिलाओं (7.5 प्रतिशत) की संख्या चार समानता वाली महिलाओं (14.4 प्रतिशत) से आधी हैं। छह समानता वाली महिलाओं का प्रतिशत घटकर 2.3 है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य जनसंख्या तीनों में तीन समानता के पश्चात् महिलाओं की संख्या में लगातार कमी हुई है (सारणी 5) । उल्लेखनीय है अधिकतम समानता अनुसूचित जाति में 10, अनुसूचित जनजाति में 9 और अन्य जनसंख्या में 7 है। तीन से अधिक समानता वाली महिलाएँ अनुसूचित जाति में 30.2 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति में 24.2 प्रतिशत और अन्य जनसंख्या में 24.3 प्रतिशत है। इससे अनुसूचित जाति में उच्च प्रजननता स्पष्ट होती है। अनुसूचित जाति के सतनामी में 10 समानता वाली महिलाएँ भी हैं किंतु मेहर में अधिकतम छह समानता वाली महिलाएँ हैं। उल्लेखनीय है कि तीन से अधिक समानता वाली महिलाएँ सतनामी में 35.0 प्रतिशत और मेहर में 20.9 प्रतिशत है। अनुसूचित जनजाति में गोंड़ और हल्बा में अधिकतम 9 समानता वाली महिलाएँ हैं। तीन से अधिक समानता वाली महिलाएँ गोंड़ और हल्बा में क्रमशः 26.0 और 26.2 प्रतिशत है।
सारणी 5
समानता और प्रजननता
समानता
;च्ंतपजलद्ध महिलाओं का प्रतिशत
अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अन्य जनसंख्या कुल
0 9ण्0 11ण्7 9ण्9 10ण्4
1 22ण्2 17ण्7 18ण्1 19ण्5
2 19ण्2 23ण्8 21ण्9 21ण्8
3 19ण्4 22ण्6 25ण्7 21ण्9
4 15ण्4 14ण्3 12ण्7 14ण्4
5 9ण्4 5ण्6 8ण्0 7ण्4
6 2ण्7 3ण्2 3ण्2 3ण्0
7 1ण्7 0ण्9 0ण्5 1ण्0
8 0ण्6 0ण्1 . 0ण्3
9 0ण्3 0ण्1 . 0ण्2
10 0ण्1 . . 0ण्1
कुल 100 100 100 100
पुत्र-जन्म को प्राथमिकता (च्तपवतपजल व िडंसम.ब्ीपसक ठपतजी)
भारतीय समाज में लड़कों को लड़कियों की अपेक्षा अधिक महत्व दिया जाता है। हिंदू धर्म के अनुसार पितृ ऋण से मुक्ति हेतु पुत्र का जन्म होना आवश्यक समझा जाता है। केवल पुत्र से परिवार का वंश चलता है एवं पुत्र से आर्थिक संरक्षण मिलता है। इस प्रकार धार्मिक-सामाजिक विचारधारा के कारण अनेक लड़कियों के होने पर भी पुत्र की आकांक्षा में परिवार का आकार बढ़ता जाता है। ‘‘आर्थिक एवं अन्य क्रियाओं में पुरूषों एवं महिलाओं की भूमिका में अंतर होता है। भारतीय दम्पति में पुत्र के लिए तीव्र इच्छा पाई जाती है। परम्परागत धार्मिक विश्वास, सामाजिक रीति-रिवाज (दहेज प्रथा, आदि) और आर्थिक लाभ-वृद्धावस्था में सहारा पुत्र-जन्म के लिए इच्छा के पीछे प्रमुख कारक हैं’’ (लहिरी, 1975)।
रायपुर संभाग में दो और तीन जन्मे बच्चों वाली महिलाओं में प्रजननता का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है। दो बच्चे वाली महिलाओं में यदि दोनों बच्चे पुत्र हुए तो सामान्य प्रजननता दर 98.5 प्रति हजार है। एक पुत्र और एक पुत्री-जन्म की स्थिति में सामान्य प्रजननता दर बढ़कर 125.4 प्रति हजार हो गई है, किंतु दो पुत्री-जन्म की स्थिति में सामान्य प्रजननता दर और भी अधिक 172.7 प्रति हजार है। तीन बच्चों वाली महिलाओं में यदि तीनों बच्चे पुत्र हैं तो सामान्य प्रजननता दर कम (29.7 प्रति हजार) है, किंतु यदि तीनों जन्मे बच्चे पुत्री है तो सामान्य प्रजननता दर 72.0 प्रति हजार है। सारांश में, पुत्र की संख्या में कमी और पुत्री की संख्या में वृद्धि के साथ प्रजननता में वृद्धि होती है। ‘‘यह मान्य सामाजिक तथ्य है कि पुत्री की अपेक्षा पुत्र को अधिक महत्व दिया जाता है। पुत्र प्राथमिकता का यह कारक लिंग अनुपात को प्रभावित करता है’’ (भारतीय जनगणना, 2001)।
बाल मत्र्यता (ब्ीपसक डवतजंसपजल)
बाल मृत्यु दर का प्रजननता पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। जनांकिकीविदों का मानना है कि प्रजननता और बाल मत्र्यता दोनों एक दूसरे को प्रभावित करते हैं। दोनों ही एक-दूसरे के कारण और प्रतिफल हैं। ‘‘हर दम्पति को यह विश्वास नही रहता है कि जन्म लेने वाली संतान जीवित ही रहेगी। अतः दम्पति अधिक संतान चाहता है’’ (व्योन एवं गोर्डेन, 1971)। वास्तव में, मृत्यु दर में कमी से अभिभावकों मंे उनके बच्चों के जीवित रहने की संभावना के संदर्भ में विश्वास बढ़ जाता है।
रायपुर संभाग में शिशु मत्र्यता दर 50.3 प्रति हजार और बाल मत्र्यता 76.9 प्रति हजार है। बाल मत्र्यता दर अनुसूचित जाति में 72.1, अनुसूचित जनजाति में 85.9 और अन्य जनसंख्या में 68.1 प्रति हजार है। संभाग में 16.3 प्रतिशत महिलाओं की एक अथवा एक से अधिक बच्चों की मृत्यु हुई है। यह प्रतिशत अनुसूचित जाति में 15.6 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति में 17.7 प्रतिशत और अन्य जनसंख्या में 14.7 प्रतिशत है।
सारणी 6
बाल मत्र्यता और प्रजननता
मृत बच्चों की संख्या प्रति स्त्री जन्मे बच्चे प्रति स्त्री जीवित बच्चे
झ 3 5ण्89 2ण्48
2 4ण्60 2ण्60
1 3ण्57 2ण्57
0 2ण्62 2ण्62
कुल 2ण्83 2ण्61
बाल मत्र्यता और प्रजननता में धनात्मक सहसंबंध ($.35) पाया गया है जो अन्य निर्धारकों के सहसंबंध की मात्रा से अधिक है। रायपुर संभाग में जिन महिलाओं के बच्चों की मृत्यु हुई उनमें प्रति स्त्री बच्चों की संख्या 3.77 है और जिन महिलाओं के एक भी बच्चे की मृत्यु नहीं हुई है उनमें प्रति स्त्री बच्चों की संख्या 2.62 है। किंतु जिन महिलाओं के एक बच्चे की मृत्यु हुई है उनमें प्रति बच्चों की संख्या 3.57 है। इसी तरह दो बच्चों की मृत्यु की स्थिति में प्रजननता दर 4.60 प्रति स्त्री है। तीन और तीन से अधिक बच्चों की मृत्यु की स्थिति में प्रजननता दर सर्वाधिक (5.89 प्रति स्त्री) है (सारणी 6)।
परिवार का प्रकार (ज्लचम व िथ्ंउपसल)
भारत में जन्म दर अधिक होने का प्रमुख कारण संयुक्त परिवार प्रणाली का लोकप्रिय होना है। पोफेनवर्ग (1969) के अनुसार चूंकि संयुक्त परिवार में आर्थिक एवं भौतिक दायित्व किसी सदस्य विशेष पर नहीं होता बल्कि सामूहिक होता है। अतः अनुत्तरदायित्व के कारण अधिक प्रजननता पाई जाती है। संयुक्त परिवार में प्रजननता निर्णय में महिलाएँ कम स्वतंत्र होती है। रायपुर संभाग में 29.0 प्रतिशत संयुक्त परिवार हैं। संयुक्त परिवार में प्रति स्त्री बच्चों की संख्या 2.55 है जबकि एकाकी परिवार में बच्चों की संख्या अपेक्षाकृत कम (2.53 प्रति स्त्री) है। दोनों में अन्तर कम है तथापि एकाकी परिवार में कम प्रजननता की प्रवृत्ति परिलक्षित होती है।
शैक्षणिक स्तर (म्कनबंजपवदंस स्मअमस)
शिक्षा प्रजननता को प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शिक्षा मनुष्य को बुद्धिमान एवं युक्तिपरक बनाकर उसे प्रेरणा प्रदान करती है। शिक्षित व्यक्ति प्रजननता दर को कम करने के संबंध में अधिक उत्साह दिखाता है। ‘‘जनसंख्या नियमन का सबसे स्थाई और प्रभावी उपाय शिक्षा का प्रसार है। इस प्रकार शिक्षा विशेषकर महिला शिक्षा न केवल शिक्षितों की प्रजननता में रोक लगाती है बल्कि समाज के अन्य वर्गों को भी प्रभावित करती है। अतः शिक्षा का कई गुना प्रभाव होता हैै’’ (कोकरेन, 1984)।
रेखाचित्र 2
सामान्यतः उच्च शिक्षा का स्तर न्यून प्रजननता से संबंधित होता है। इस संबंध में स्त्री शिक्षा का विेशेष स्थान है। स्त्री शिक्षा और प्रजननता में ऋणात्मक सहसंबंध होता हैै (चांदना एवं शर्मा, 1987: गुप्त एवं बघेल, 1994)। रायपुर संभाग में प्रजनन आयु वर्ग (15 से 49 वर्ष) की 37.5 प्रतिशत महिलाएँ साक्षर हैं। अन्य जनसंख्या में महिला साक्षरता 45.4 प्रतिशत है। अनुसूचित जाति (38.1 प्रतिशत) और अनुसूचित जनजाति (33.8 प्रतिशत) में महिला साक्षरता का प्रतिशत अन्य जनसंख्या की तुलना में कम है। अनुसूचित जनजाति के अंतर्गत मेहर में महिला साक्षरता सर्वाधिक (59.2 प्रतिशत) है। उसके विपरीत देवार में यह प्रतिशत सबसे कम (19.2 प्रतिशत) है। अनुसूचित जाति के अंतर्गत सर्वाधिक साक्षरता हल्बा (58.1 प्रतिशत) में और सबसे कम कमार (5.8 प्रतिशत) में है।
रायपुर संभाग में 37.7 प्रतिशत साक्षर महिलाएँ प्राथमिक स्तर से कम और 31.4 प्रतिशत साक्षर महिलाएँ प्राथमिक स्तर पर शिक्षित है। माध्यमिक स्तर तक पढ़ी महिलाओं का प्रतिशत 15.4 प्रतिशत और माध्यमिक से अधिक पढ़ी महिलाएँ 15.5 प्रतिशत है। अन्य जनसंख्या की महिलाओं में 28.3 प्रतिशत प्राथमिक स्तर से कम, 27.6 प्रतिशत प्राथमिक स्तर, 19.2 प्रतिशत माध्यमिक स्तर और 24.9 प्रतिशत माध्यमिक स्तर से अधिक शिक्षित हैं। अनुसूचित जातियों में माध्यमिक स्तर (13.5 प्रतिशत) और माध्यमिक से अधिक शिक्षित (15.8 प्रतिशत) महिलाएँ कम है। अनुसूचित जनजातियों में 74.7 प्रतिशत महिलाएँ प्राथमिक अथवा प्राथमिक स्तर से कम पढ़ी हैं। इसके विपरीत माध्यमिक से अधिक शिक्षित महिलाएँ मात्र 0.3 प्रतिशत है। अनुसूचित जाति के अंतर्गत मेहर में माध्यमिक स्तर से अधिक शिक्षित महिलाएँ (30.़4 प्रतिशत) अपेक्षाकृत अधिक है। अनुसूचित जनजाति के अंतर्गत हल्बा में 15.4 प्रतिशत महिलाएँ माध्यमिक स्तर से अधिक शिक्षित हैं।
रायपुर संभाग में प्रति स्त्री बच्चों की संख्या निरक्षर महिलाओं में 2.72 और साक्षर महिलाओं में 2.2 है। अन्य जनसंख्या में साक्षर महिलाओं (2.35 प्रति स्त्री) में निरक्षर महिलाओं (2.67 प्रति स्त्री) की तुलना में प्रजननता दर कम है। अनुसूचित जाति में प्रति स्त्री बच्चों की संख्या निरक्षर महिलाओं में 2ण्92 और साक्षर महिलाओं में 2.18 हैं। अनुसूचित जनजाति में साक्षर महिलाओं (2.20 प्रति स्त्री) में निरक्षर महिलाओं (2.59 प्रति स्त्री) की तुलना में प्रजननता दर कम है।
सामान्यतः उच्च शिक्षा का स्तर न्यून प्रजननता से संबंधित होता है। महिलाओं के शैक्षणिक स्तर में वृद्धि से बच्चों के पालन-पोषण की
लागत बढ़ती है जिससे प्रजननता कम होती है (पारिख एवं गुप्ता, 2001) रायपुर संभाग में प्राथमिक स्तर से कम शिक्षित महिलाओं में प्रति स्त्री बच्चों की संख्या 2.62 है। प्रजननता प्राथमिक स्तर पर 2.10, माध्यमिक स्तर पर 1.91 और माध्यमिक स्तर से अधिक शिक्षित महिलाओं में 1.82 प्रति स्त्री है। महिलाओं के शैक्षणिक स्तर और प्रजननता के बीच विपरीत सहसंबंध (-.1861) पाया गया है।
सारणी 7
महिलाओं का शैक्षणिक स्तर और प्रजननता
शैक्षणिक सतर प्रति स्त्री बच्चे
अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अन्य जनसंख्या कुल
माध्यमिक से अधिक 1ण्62 1ण्88 2ण्00 1ण्82
माध्यमिक 2ण्05 1ण्69 2ण्06 1ण्91
प्राथमिक 2ण्13 1ण्94 2ण्40 2ण्10
बिना शैक्षणिक स्तर के साक्षर 2ण्55 2ण्60 2ण्83 2ण्62
कुल साक्षर 2ण्18 2ण्20 2ण्35 2ण्22
निरक्षर 2ण्92 2ण्59 2ण्67 2ण्72
कुल 2ण्64 2ण्46 2ण्52 2ण्54
अन्य जनसंख्या की महिलाओं में प्राथमिक स्तर से कम शिक्षित महिलाओं में प्रति स्त्री बच्चों की संख्या 2.83, प्राथमिक स्तर पर 2.40, माध्यमिक स्तर पर 2.06 और माध्यमिक स्तर से ऊपर 2.00 है। अनुसूचित जाति में प्राथमिक स्तर से कम शिक्षित महिलाओं में प्रति स्त्री बच्चों की संख्या 2.55, प्राथमिक स्तर पर 2.13, माध्यमिक स्तर पर 2.05 और माध्यमिक स्तर से ऊपर 1.62 है। अनुसूचित जनजाति में प्रति स्त्री बच्चों की संख्या प्राथमिक से कम शिक्षित महिलाओं में 2.60, प्राथमिक स्तर पर 1.92 और माध्यमिक स्तर से ऊपर 1.88 है। अतः अन्य जनसंख्या, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति तीनों में महिलाओं के शैक्षणिक स्तर में वृद्धि के साथ प्रजननता दर में कमी हुई है (सारणी 7 एवं रेखाचित्र 2)।
प्रजननता को प्रभावित करने वाले कारकों में पति की शिक्षा भी महत्वपूर्ण है। रायपुर संभाग 62.8 प्रतिशत पति साक्षर हैं। संभाग में अन्य जनसंख्या के साक्षर पति में प्रति स्त्री बच्चों की संख्या 2.52 और निरक्षर पति 2.55 है। अनुसूचित जातियों में साक्षर पति में प्रजननता प्रति स्त्री 2.48 बच्चे हैं जबकि निरक्षर पति में प्रति स्त्री 2.93 बच्चे हैं। अनुसूचित जनजाति में साक्षर पति में प्रति स्त्री बच्चों की संख्या 2.37 और निरक्षर पति में 2.60 है। शैक्षणिक स्तर में वृद्धि के साथ प्रजननता में कमी हुई है। कम शिक्षित पतियों के पत्नियों में प्रजननता दर अधिक और उच्च शिक्षित पतियों की पत्नियों में प्रजननता दर कम पाई जाती है। रायपुर संभाग में प्राथमिक स्तर से कम और प्राथमिक स्तर पर शिक्षित पति में प्रति स्त्री बच्चों की संख्या समान (2.64) है। किंतु माध्यमिक स्तर पर प्रजननता दर घटकर 2.12 प्रति स्त्री है। उल्लेखनीय है कि प्राथमिक स्तर तक शिक्षित महिलाओं में प्रजननता दर (2.10) माध्यमिक से अधिक शिक्षित पतियों की प्रजननता दर से कम है। उल्लेखनीय है कि पति की तुलना में महिला के शैक्षणिक स्तर का प्रजननता पर प्रभाव अधिक पाया गया है। वास्तव में, महिला की शिक्षा प्रजननता दर को प्रत्यक्ष और परोक्ष दोनों रूपों से प्रभावित करता है।
पति का व्यवसाय (व्बबनचंजपवद व िभ्नेइंदके)
प्रजननता पर सामाजिक-आर्थिक स्तर का स्पष्ट प्रभाव पाया जाता है। सामान्यतः उच्च आर्थिक स्तर वालों की अपेक्षा निम्न आर्थिक स्तर वालों मेें प्रजननता दर ऊँची होती है। ‘‘व्यवसाय की प्रकृति सामाजिक एवं आर्थिक स्तर का सूचक है और प्रजननता विशेषकर परिवार के मुखिया के व्यवसाय में भिन्नता से प्रभावित होती है’’ (गुरूस्वामी, 1997)। रायपुर संभाग में कुल कार्यशील पतियों में से 48.9 प्रतिशत कृषि श्रमिक और 38.7 प्रतिश्त कृषक हैं। अन्य सेवा में 6.4 प्रतिशत और व्यापार में 2.9 प्रतिशत पति संलग्न हैं। संभाग में कृषकों (2.63) की तुलना में कृषि श्रमिकों (2.54) में प्रजननता दर कम पाई गई। अन्य सेवाओं में संलग्न लोगांें में प्रजननता अपेक्षाकृत कम (2.34) है। अन्य जनसंख्या में भी कृषकों (6.62) की तुलना में कृषि श्रमिकों (2.55) में प्रजननता कम है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति में भी कृषकों की तुलना में कृषि श्रमिको में प्रजननता दर कम है। अनुसूचित जाति में प्रजननता कृषकों में 2.77 और कृषि श्रमिकों में 2.57 और अनुसूचित जनजातियों में कृषि श्रमिकों में 2.54 और कृषि श्रमिकों में 2.50 प्रति स्त्री है।
पारिवारिक आय (भ्वनेमीवसक प्दबवउम)
पति की आय परिवार में बच्चों के पालन-पोषण की क्षमता को इंगित करता है। विभिन्न स्थानों और विभिन्न समयों पर किए गए अध्ययनों में यह पाया गया है कि विभिन्न आय स्तर के लोगों में प्रजननता दर समान न होकर भिन्न-भिन्न हैं। ‘‘आय स्तर और प्रजननता के बीच श्न्श् आकृति के वक्र का संबंध होता है। जब आय का स्तर नीचा होता है तो प्रजननता ऊँची होती है। जब आय का स्तर मध्यम वर्ग का होता तो प्रजननता न्यूनतम होती है। किंतु उच्च आय स्तर में प्रजननता में पुनः बढ़ने की प्रवृत्ति पाई जाती है’’ (बोग, 1969)। रायपुर संभाग में मासिक पारिवारिक आय रू. 1400 है। अन्य जनसंख्या में पारिवारिक आय रू. 1715 है। अनुसूचित जाति (रू.1311) और अनुसूचित जनजाति (रू. 1348) में पारिवारिक आय अन्य जनसंख्या से कम है।
सारणी 8 पारिवारिक आय और प्रजननता
मासिक आय
(रू.) प्रति स्त्री बच्चे
अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अन्य जनसंख्या कुल
झ 8000 2.00 2.70 3.13 2.47
4000.8000 2.63 2.62 2.71 2.64
2000.4000 2.86 2.53 2.71 2.69
1000.2000 2.88 2.64 2.67 2.74
500.1000 2.49 2.34 2.37 2.40
ढ 500 2.12 2.29 1.67 2.18
कुल 2.64 2.46 2.52 2.54
रायपुर संभाग में जिन महिलाओं की पारिवारिक आय रू. 500 से कम है उनमें प्रति स्त्री बच्चों की संख्या 2.14 है जो रू. 500-1000 आय स्तर पर बढ़कर 2.41 और रू. 1000-2000 आय स्तर पर 2.74 प्रति स्त्री हैं। तत्पश्चात् प्रजननता में कमी हुई है। ‘‘आय में प्रारंभिक वृद्धि से स्वास्थ्य और पोषण स्तर में सुधार होता है जो प्रजनन अवधि पूरी करने वाले व्यक्तियों की संख्या में वृद्धि के साथ प्रजनन क्षमता और प्रजननता में वृद्धि करती है’’ (रिडकल, 1969)। अन्य जनंसख्या और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं में पारिवारिक आय में वृद्धि के साथ प्रजननता दर में क्रमशः वृद्धि हुई है। अन्य जनसंख्या में रू. 500 से कम आय स्तर पर प्रजननता दर 1.31 और रू. 8000 से अधिक आय स्तर पर यह दर 3.13 प्रति स्त्री है। अनुसूचित जनजाति में रू. 500 से कम पारिवारिक आय पर प्रति स्त्री बच्चों की संख्या 2.29 है जो रू. 8000 से अधिक आय स्तर पर क्रमशः बढ़कर 2.70 प्रति स्त्री है। अनुसूचित जाति में रू. 2000 मासिक आय तक प्रजननता स्तर में वृद्धि हुई है किंतु इसके बाद प्रजननता दर में क्रमशः कमी हुई है (सारणी 8)।
परिवार नियोजन (थ्ंउपसल च्संददपदह)
प्रजननता को प्रभावित करने वाले प्रत्यक्ष सामाजिक तत्वों में संतति नियमन संबंधी उपायों का समावेश किया जाता है। इसके अंतर्गत मुख्यतः निरोधक अर्थात अस्थाई उपाय तथा बंध्याकरण सम्मिलित हैं। ‘‘यह सत्य है कि विभेदात्मक विवाह दरें तथा विभेदात्मक यौन गतिविधियाँ प्रजननता में अंतर लाते हैं, किंतु सर्वाधिक महत्वपूर्ण तत्व निरोधक उपायों का विभेदात्मक प्रयोग है’’ (बोग, 1969)। रायपुर संभाग में 32.7 प्रति दम्पतियों ने संतति नियमन की स्थाई विधि बंध्याकरण को अपनाया है। इनमेें से 91.2 प्रतिशत महिला और शेष 8.8 प्रतिशत पुरूष है। ‘‘पुरूष रोजी-रोटी कमाने वाला और परिवार की सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा का आधार होता है। अतः महिलाएँ पुरूषों के स्वास्थ्य के संबंध में जोखिम नही चाहतीं’’ (महादेवन, 1979)।
संभाग में दम्पति सुरक्षा दर (ब्वनचसम च्तवजमबजपवद त्ंजम) अन्य जनसंख्या में 47.5 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति में 38.1 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति में 40.2 प्रतिशत है। अनुसूचित जाति में 29.3 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति 33.5 प्रतिशत और अन्य जनसंख्या में 37.8 प्रतिशत दम्पतियों ने परिवार नियोजन की स्थाई विधि को अपनाया है। अनुसूचित जाति के अन्तर्गत सबसे अधिक बसोड़ (53.1 प्रतिशत) और सबसे कम देवार (21.0 प्रतिशत) ने स्थाई विधि को अपनाया है। अनुसूचित जनजातियों में हल्बा (44.8 प्रतिशत) ने संतति नियोजन की स्थाई विधि को सबसे अधिक अपनाया है। इसके विपरीत कमार में मात्र 12.़6 प्रतिशत दम्पतियों ने स्थाई विधि को अपनाया है।
रायपुर संभाग में औसत 3.5 बच्चों के जन्म के बाद दम्पतियों ने परिवार नियोजन की स्थाई विधि को अपनाया है। स्थाई विधि को अपनाने वाले दम्पतियों में से 21.3 ने दो बच्चों के जन्म के बाद तथा एक-तिहाई (31.3 प्रतिशत) ने तीन बच्चों के जन्म के बाद इस विधि को अपनाया है (सारणी 9)। चार बच्चों के जन्म के बाद परिवार नियोजन की स्थाई विधि को अंगीकार करने वाले दम्पति अनुसूचित जाति में 30.1 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति में 24.5 प्रतिशत और अन्य जनसंख्या में 20.4 प्रतिशत है।
सारणी 9 बच्चों की संख्या और बंध्याकरण
बच्चों की संख्या दम्पतियों का प्रतिशत
अनुसूचित
जाति अनुसूचित
जनजाति अन्य
जनसंख्या कुल
झ5 9.3 4.3 5.9 5.7
5 13.5 11.8 14.1 12.9
4 30.1 24.5 20.4 25.7
3 26.6 37.1 34.5 35.3
2 19.1 21.3 24.2 21.3
1 1.4 1.0 0.9 1.1
कुल 100 100 100 100
बंध्याकरण पुत्र-जन्म की संख्या से संबंधित होता है। दो पुत्र और एक पुत्री-जन्म की स्थिति में बंध्याकरण वाले दम्पति सर्वाधिक 18.9 प्रतिशत हैं। दो पुत्र और दो पुत्रियाँ-जन्म की स्थिति में बंध्याकरण वाले दम्पति 13.3 प्रतिशत है। अधिक बच्चों की स्थिति में प्रायः दो या तीन पुत्र-जन्म के बाद में माताओं ने बंध्याकरण कराया है।
अस्थाई विधियों में कन्डोम, काॅपर टी, लूप, गर्भ निरोधक गोलियों, इत्यादि का समावेश किया जाता है। रायपुर संभाग में 8.0 प्रतिशत दम्पतियों ने परिवार नियोजन की अस्थाई विधि को अपनाया है। अस्थाई विधियों को अपनाने वाले दम्पतियों ने 2.़54 बच्चों के जन्म के बाद इन विधियांें को अंगीकार किया है। अनुसूचित जाति में 8.8 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति में 6.4 प्रतिशत और अन्य जनसंख्या में 9.8 प्रतिशत दम्पतियों ने अस्थाई विधियों को अंगीकार किया है। ‘‘निरोधक उपायों का उपयोग अनेक सामाजिक-आर्थिक और धार्मिक विशेषताओं से घनिष्ट रूप से संबंधित है’’ (स्पिगलमेन, 1973 ; जैन, 1974)।
रायपुर संभाग में अस्थाई विधि को अपनाने वाले दम्पतियों में से 48.9 प्रतिशत गर्भ निरोधक गोली, 11.4 कन्डोम, 7.5 प्रतिशत काॅपर टी और 3.4 प्रतिशत लूूप का प्रयोग किया है। अनुसूचित जाति में परिवार नियेाजन की अस्थाई विधि को अंगीकार करने वाले दम्पतियों में से 47.2 प्रतिशत गर्भ निरोधक गोली, 10.3 प्रतिशत कन्डोम और 5.7 प्रति काॅपर टी का उपयोग करते हैं। 8.0 प्रतिशत दम्पति जड़ी-बूटी का प्रयोग परिवार नियोजन की अस्थाई विधि के रूप में करते है। अनुसूचित जाति में 52.6 प्रतिशत गर्भ निरोधक गोली और 10.3 काॅपर टी का उपयोग करते हंै। अनुसूचित जनजातियों में कन्डोम (7.7 प्रतिशत) का उपयोग अपेक्षाकृत कम और जड़ी-बूटी (9.0 प्रतिशत) का प्रयोग अपेक्षाकृत अधिक है। अन्य जनसंख्या में 45.4 प्रतिशत गर्भ निरोधक गोली, 19.4 प्रतिशत कन्डोम और 6.6 प्रतिशत दम्पति लूप का प्रयोग करते है (सारणी 10)। अनुसूचित जातियों में मेहर (10.7 प्रतिशत) ने परिवार नियोजन की अस्थाई विधियों को सर्वाधिक अपनाया है, जबकि देवार जाति में यह प्रतिशत मात्र 7.9 है। अनुसूचित जनजातियों में भंुजिया (11.8 प्रतिशत) ने परिवार नियेाजन की अस्थाई विधि को अंगीकार किया है, जबकि कमार में मात्र 1.0 प्रतिशत दम्पतियों ने परिवार नियोजन की अस्थाई विधि को अपनाया है।
सारणी 10 निरोधक उपाय और उनका उपयोग करने वाले दम्पति
निरोधक उपाय दम्पतियों का प्रतिशत
अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अन्य जनसंख्या कुल
आत्म नियंत्रण एवं सुरक्षित काल 26.5 17.9 21.4 22.0
गर्भ निरोधक गोलियाँ 47.2 52.6 45.4 48.9
कन्डोम 10.3 7.7 19.4 11.4
कापर टी 5.7 10.3 6.9 7.5
लूप 2.3 2.5 6.9 3.4
अन्य विधि 8.0 9.0 . 6.8
कुल 100 100 100 100
निष्कर्ष
वर्तमान समय में जनसंख्या की महत्वपूर्ण समस्या उच्च जन्म दर है। अल्प शिक्षित ग्रामीण समाज में जन्म दर को नियंत्रित करने में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है। वास्तव में, प्रजननता में कमी लाने के लिए शिशु मत्र्यता दर में कमी लानी होगी। भारत में केन्द्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर शिक्षा विशेषकर महिला शिक्षा को प्रजननता दर में कमी लाने का सबसे सशक्त संकेतक पाया गाय है। लड़की के लिए शिक्षा एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने से समाज में लड़कियों का स्थान सम्मानजनक एवं अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगा। वास्तव में, जनसंख्या नियंत्रण की नीति को सफल बनाने के लिए सामाजिक वातावरण में संरचनात्मक परिवर्तन किए जाए।
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Received on 13.05.2009
Accepted on 10.06.2009
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Research J. of Humanities and Social Sciences. 1(1): Jan.-March 2010, 13-20